चंद्रशेखर पर रासुका की अवधि तीन महीने और बढ़ाई गई

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पिछले साल हुई जातीय हिंसा के बाद भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (रासुका) को तीन महीने के लिए और बढ़ा दिया गया. 23 जनवरी को जारी उत्तर प्रदेश सरकार के उपसचिव (गृह) विजय शंकर पांडेय द्वारा एक आदेश में कहा गया है कि चंद्रशेखर पर रासुका दोबारा लगा दिया गया है.

आदेश पत्र में कहा गया है कि मुज़फ़्फ़रनगर के ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई गए राष्ट्र सुरक्षा कानून, 1980 की धारा 12(1) को दोबारा लागू कर दिया गया जो अब 6 महीने की है. अब उन लागू रासूका 2 नवंबर, 2017 से लागू माना जाएगा.

मई 2017 को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलित और ठाकुर समुदाय के बीच जातीय हिंसा हुई थी. घटना के बाद चंद्रशेखर का नाम सामने आया था, जो कि भीम आर्मी के संस्थापक हैं. पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ कई धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया था. उसके बाद वह भूमिगत हो गए थे. कुछ महीने बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने हिमाचल प्रदेश से उन्हें गिरफ़्तार किया था.

दो नवंबर, 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चंद्रशेखर उर्फ रावण को जमानत दे दी थी. लेकिन उसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने रासुका लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत किसी व्यक्ति को पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है. फिर आवश्यकतानुसार तीन-तीन महीने के लिए गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है. एक बार में तीन महीने से अधिक की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती है.
वही इस घटना का विरोध सारे देश में हो रहा हे अनुसूचित जाती जनजाति पिछड़ा वर्ग युवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजू बिछोले ने कहा की युवा यूपी सरकार की इस कार्याही की निंदा करता हे इस तरह से सरकार युवाओं को डारने का काम कर रही हे पर युवा डरने बाले नहीं हे हम उस बीज की तरह हे जिसे जितना गाडोगे उतनी ही मजबूती से भर निकले गए।

भीम आर्मी डिफेंस कमेटी के संयोजक और जेएनयू के छात्रनेता प्रदीप नरवाल ने कहा, ‘उत्तर प्रदेश सरकार चंद्रशेखर से डरी हुई है और नहीं चाहती कि प्रदेश में कोई भी दलित नेतृत्व खड़ा हो. सभी 27 मामलों में जमानत मिलने के बाद भी जेल में बंद रखना सरकार का डर दिखाता है कि अगर दलित आगे बढ़ेंगे, तो वे मनुवादी व्यवस्था पर सवाल उठाएंगे.’

Categories: uncategorized

Comments are closed