नाबालिग छात्र एवं ग्रामीणों की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन पुलिस एवं प्रशासन पर सत्ताधारी दल के नेताओं की कटपुतली बनने का आरोप

नाबालिग छात्र को जेल भेजे जाने की घटना की जांच कर कार्यवाही किये जाने की मांग
पन्ना। ग्राम जसवंतपुरा में खुले आसमान के नीचे चार बीमार बच्चियों एवं मानसिक रूप से बीमार पत्नि के साथ जानवरों से बत्तर जीवन जी रहे आदिवासी परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित किये जाने के लिये ग्राम जसवंतपुरा से शुरू हुई लड़ाई जिला मुख्यालय पहुंच गयी है। जसवंतपुरा स्थित पन्ना कटनी मार्ग में जब आंदोलनकर्ता ग्रामीणों द्वारा चक्का जाम कर दिया गया जो कि बाद में समाप्त भी हो गया। किंतु चक्का जाम समाप्त होने के बाद बोखलाये पुलिस एवं प्रशासन का अंदाज बदल गया और गरीब आदिवासी परिवार को उसका हक दिलाने के लिये आंदोलन में शामिल हुये ग्रामीणों के साथ ही एक नाबालिग छात्र सहित कुछ ऐसे लोगो की अमानगंज पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया जो आंदोलन में शामिल नही थे। पुलिस द्वारा एक दर्जन ग्रामीणों को पकडने के बाद उनके विरूद्ध धारा १५१ तथा धारा १०७ध्११६ का इस्तगाशा कायम करते हुये अनुविभागीय दण्डाधिकारी न्यायलय में पेश कर दिया गया। पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गये सभी १२ ग्रामीणों को इसके बाद यहां से जमानत भी नही मिली और नाबालिग छात्र सहित सभी ग्रामीण चार दिन से जेल के अंदर है। पुलिस एवं प्रशासन द्वारा इस तरह की कार्यवाही के विरोध में आज जसवंतपुरा से शुरू हुआ आंदोलन जिला मुख्यालय पन्ना पहुंच गया यहां पर अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग युवा संघ द्वारा सैकड़ों की संख्या में छात्रों एवं जसवंतपुरा तथा क्षेत्रांचल से आये बड़ी संख्या में ग्रामीणों के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुये जय स्तम्भ पार्क में सभा का आयोजन किया गया। इस पार्क में आयोजित इस आम सभा में अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग युवा संघ के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह जाटव ने कहा कि ग्राम जसवंतपुरा में एक बेसहारा मजदूर गरीब आदिवासी परिवार की स्थिति रूला देने वाली है। आदिवासी पिता अपनी चार उन बच्चियों को मजदूरी करके पाल रहा है जिसमें से एक बच्ची उठ चल और बोल तक नही सकती जिसके तन के लिये कपड़े तक नही है। तीन अन्य बच्चियां बीमार है जिनके लिये न तो उपचार मिल रहा है और न कोई सुविधा। बरसाती पन्नियों की छाया बना कर गरीब आदिवासी परिवार बेहद ही बुरी स्थिति में जी रहा है। बच्चियों को उपचार की जरूरत है और परिवार को रहने के लिये घर की जरूरत है किंतु शासन एवं प्रशासन किस तरह से चल रहा है यह गरीब आदिवासी परिवार से आवास का हक भी छीन लिया गया है और जब इसके लिये स्थानीय ग्रामीणों तथा कुछ युवाओं द्वारा आवाज उठायी गयी तो पुलिस एवं प्रशासन ने आपातकाल में जैसा होता है वैसी ही कुछ कार्यवाही करते हुये लोगो को पकड़ कर जेल भिजवाया दिया गया। बेगुनाह नाबालिग छात्र तक को नही छोड़ा गया कानून की धज्जिया उड़ाते हुये छात्र को भी जेल के अंदर भेज दिया गया है। जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा ने कहा कि जसवंतपुरा के ग्रामीणों के साथ जो भी हुआ है वह पुलिस एवं प्रशासन द्वारा सत्ताधारी दल के नेताओं के इशारों पर किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना में धांधली हो रही है जिससे जरूरतमंदों को किनारे करते हुये मनमाने तरीके से इस योजना को चलाया जा रहा है तथा झूठी वाह-वाही की जा रही है। पुलिस ही कानून का मजाक उड़ा रही है। जसवंतपुरा में रहने वाले नाबालिग छात्र को जेल भेजा जाना न केवल कानून का उल्लघन है बल्कि अमानगंज पुलिस का यह अपराधिक कृत है जिसकी पूरी जांच हो एवं दोषियों पर कार्यवाही हो। श्री मिश्रा ने कहा कि जिले में कई बार आंदोलन हुये है सडक जाम की घटनायें भी हुई है किंतु पन्ना पुलिस द्वारा इस घटना के पहले लोगो को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्यवाहियां नही की गयी। जसवंतपुरा के ग्रामीणों को पकडना और उसके बाद उन्हे जमानत न मिलना और चार दिन से लगातार उन्हे जेल में रखने से यह बात साफ जाहिर है कि पुलिस एवं प्रशासन सत्ताधारी दल की कठपुतली की तरह काम करते हुये कानून व्यवस्था का मजाक उड़ाने का काम कर रही है। जय स्तम्भ पार्क में करीब एक से डेढ़ घण्टे तक चली सभा में जिन ग्रामीण परिवारों के सदस्यों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है उनके द्वारा पुलिस पर प्रताडि़त करने का आरोप लगाया है तथा कहा कि ग्रामीणों को पुलिस से धमकियां मिल रही है और अमानगंज पुलिस द्वारा फर्जी तरीके से मामले दर्ज करने की जानकारियां सामने आ रही है। धरना प्रदर्शन को छात्र युवा संघ के अध्यक्ष संजय अहिरवार सहित छात्र युवा संघ के अन्य छात्र नेताओं ने भी संबोधित किया तथा कहा है कि यदि छात्रों एवं नौजवानों पर पुलिस एवं प्रशासन की अमानवीय कार्यवाही को बर्दाश्त नही किया जायेगा और इंसाफ की लड़ाई यहां से दिल्ली तक लड़ी जायेगी। धरना प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्ट्रेट स्थित जयस्तम्भ चौक में पहुंच कर अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग युवा संघ द्वारा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा गया। ज्ञापन में जसवंतपुरा के मरीयल आदिवासी को तत्काल आवास दिये जाने, उसकी बीमार बेटियों का शासन स्तर से उपचार करवायें जाने तथा पुलिस द्वारा जसवंतपुरा के ग्रामीणों तथा आंदोलन कारियों के विरूद्ध दर्ज मुकदमें को समाप्त किये जाने, गिरफ्तार किये गये सभी ग्रामीणों को तुरंत ही रिहा किये जाने तथा नाबालिग छात्र तथा अन्य बेगुनाह छात्रों के विरूद्ध पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही की जांच करवाते हुये जिम्मेदारों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही किये जाने की मांग की गयी है। ज्ञापन में मातादीन अहिरवार, अनिल कुमार चौधरी, नरेन्द्र कुमार वर्मा, अशोक अहिरवार, अभिनव सिंह, धमेन्द्र कुमार वर्मा, राहुल सिंह जाटव, नंदकिशोर वर्मा, संजय कुमार वर्मा, मनोज जैन, पुन्ना लाल, जुगराज, सुनील, नगजू, रूपबसंत, शीतल, रामऔतार, रविन्द्र, भुवन आदि उपस्थित रहे। जसवंतपुरा की घटना को लेकर आज पन्ना जिला मुख्यालय में हुये विरोध प्रदर्शन में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा की गयी कार्यवाही का विरोध करते हुये निन्दा करते हुये जांच की मांग की गयी। कांग्रेस के जो नेता विरोध प्रदर्शन में शामिल हुये उनमें नगर परिषद अमानगंज के अध्यक्ष हक्कुन दहायत, जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री रावेन्द्र प्रताप सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष मनीष मिश्रा, गुनौर जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह परमार, कृषि उपज मण्डी के पूर्व सदस्य उत्तम सिंह, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह गहिरवार, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी शाहनगर अध्यक्ष आजाद सहीद खान, पूर्व सरपंच मोतीलाल द्विवेदी आदि शामिल थे।

Categories: अन्याय अत्याचार

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