भोपाल में उम्मीद से कम कार्यकर्ता पहुंचे तीन राज्यों की बसपा रैली में।

अगले साल मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं. मायावती को उम्मीद है कि उनकी पार्टी इन दोनों राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करेगी. इसी उम्मीद में मायावती ने शुक्रवार को भोपाल में कार्यकर्ताओं की एक बड़ी रैली कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की है.उन्होंने कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी को सरकार से हटाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.
बीएसपी सुप्रीमो बनने के बाद से ही मध्यप्रदेश में पार्टी का जनाधार तेजी से विभाजित हुआ है. मध्यप्रदेश के कुछ इलाके ही ऐसे हैं, जहां कि बीएसपी अच्छी स्थिति में मानी जाती रही है. ये इलाके उत्तरप्रदेश की सीमाओं से लगे हुए हैं. ग्वालियर-चंबल संभाग, रीवा संभाग और सागर संभाग में बीएसपी वोटों का गणित बिगाड़ने में सक्षम मानी जाती है. इन तीनों संभागों में साठ से अधिक विधानसभा की सीटें आती हैं.
. मायावती को रैली फेल होने का डर सता रहा था. इसी कारण छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में लोगों को भोपाल लाया गया. रैली में दस लाख लोगों के एकत्रित होने का दावा किया गया था, लेकिन पचास हजार लोग भी जुटा पाईं.

मध्यप्रदेश में कांग्रेस भी यह अच्छी समझ गई है कि यदि राज्य में बीजेपी को सत्ता से हटाना है तो विरोधी वोटों का विभाजन रोकना होगा. मध्यप्रदेश में अब तक कांग्रेस और बीएसपी का कोई समझौता नहीं हुआ है. बीजेपी और बीएसपी ने जरूर रणनीतिक समझौता किया था. कांग्रेस की राजनीति का आधार भी दलित और आदिवासी वोटर ही है. दलित और आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें हमेशा ही कांग्रेस की सरकार बनाने में मदद करती रही हैं.
जबकि मायावती को ज्यादातर सफलता गैर आरक्षित सीटों पर ही मिलती रही है. पिछले विधानसभा चुनाव में दलित-आदिवासी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को अपेक्षा के विपरीत सफलता मिली थी. पार्टी इन सीटों को आगे भी बरकरार रखना चाहती है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों की दिक्कत दलित चेहरे को लेकर है. दोनों ही दलों में ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जो सर्व स्वीकार्य हो.

भोपाल की रैली में मायावती ने कांग्रेस पर कोई हमला नहीं बोला.उनके भाषण के केंद्र में सिर्फ राम मंदिर और बीजेपी ही रहे. उन्होंने रैली में हिस्सा लेने आए लोगों से कहा कि राम मंदिर से दलितों का कोई भला होने वाला नहीं है. दलितों को अधिकार किसी मंदिर के देवता ने नहीं वरन बाबा साहब अंबेडकर के कारण मिले हैं. मध्यप्रदेश में बीएसपी के वर्तमान में सिर्फ चार विधायक हैं.
कुछ दिन पहले मायावती जी ने कार्यकर्ताओं से कहा था उन्हें किसी प्रकार का कोई गिफ्ट उपहार नदी है मध्य जाए इसके बावजूद भी मध्य प्रदेश की रैली में पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा बहन जी को सोने का मुकुट और चांदी की तलवार भेंट की गई कहीं ना कहीं पार्टी के पदाधिकारियों द्वारा चाटुकारिता दिखाती है वहीं दूसरी तरफ 3 राज्यों को मिलाकर भोपाल में किए गए पार्टी के रैली में जितनी संख्या मैं लोगों की उम्मीद की गई थी उसके बावजूद भी वहां पर लगभग 50 से 70 हजार लोग ही रैली में शामिल हुए गलत नीतियों के कारण आज बहुजन समाज पार्टी का जनाधार बढ़ने की वजाय बहुत तेजी से नीचे आ रहा है नए युवाओं में पार्टी की विचारधारा और गाइड लाइन के संबंध में कोई जानकारी नहीं है वही पार्टी की ओर से भी युवाओं को जोड़ने के लिए किसी प्रकार की कोई पहल नहीं की जा रही है पार्टी में युवा छात्रों को ही कोई शाखा है

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