मध्य प्रदेस में दिग्विजय सिंह जी नहीं होते तो कांग्रेस का हाल उतरप्रदेश जैसा हो जाता।

आज मध्यप्रदेश में लगातार दलित आदिवासियों के ऊपर अत्याचार बढ़ता जा रहा हैं आए दिन प्रदेश के किसी न किसी कोने में कोई घटना जरूर हो रही है अभी हाल ही में मध्य प्रदेश की राजधानी के नजदीक बैरसिया में एक दलित किसान को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया गया भाजापा की सरकार में लगातार दलित आदिवासी समाज की लोगों पर अत्याचार बढ़ रहे है।

जिस समय मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी थे दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में दलित आदिवासी समाज को सरकारी दामाद की उपाधि दी जाती थी मध्यप्रदेश में दामादों को बहुत मान सम्मान दिया जाता है उसी तरह के हालात दलित आदिवासी समाज के लोगों के थे उनके साथ पूरे प्रदेश में समानता का व्यवहार किया जाता था और मुख्यमंत्री की योजनाओं का लाभ इस वर्ग के लोगों को युवाओं को बड़े पैमाने पर भी दिया गया यहां तक कि कहा जाता है कि मुख्यमंत्री माननीय दिग्विजय सिंह जी ने दिल खोलकर दलित आदिवासी समाज के लोगों पर सरकारी खजाना लुटाया और उसका लाभ भी लोगों को मिला बड़े पैमाने पर दलित आदिवासी समाज के लोगों को सरकारी नौकरियां मिली उनका आर्थिक सामाजिक स्थर भी सुधरा और में प्रतिष्ठा मिली इसमें कोई दो राय नहीं है कि मध्य प्रदेश के इतिहास में दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में दलित आदिवासी समाज जो लाभ पहुंचाया गया है आज तक भी कोई भी मुख्यमंत्री नहीं कर पाया है अनुसूचित जाति जनजाति थानों में विशेष आदेश दिए गए थे कि दलित आदिवासियों पर किसी भी तरह की प्रताड़ना उनके साथ गलत होता है तो तत्काल कार्यवाही की जाए पुलिस के भय के कारण इस वर्ग के लोगों पर अत्याचार होने काफी कम हो गए थे।

आज आप देख सकते हैं कि भाजपा सरकार में किस तरह से दलित आदिवासी समाज के लोगों पर जुल्म ढाए जा रहे हैं पुलिस उनकी सुरक्षा करने के बजाए युवाओं पर फर्जी प्रकरण दर्ज कर उनकी आवाज को दबाने का भी काम कर रही है अभी हाल में 2 अप्रैल के बंद के दौरान हजारों बेकसूर युवाओं पर प्रकरण दर्ज कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का भी काम भाजपा सरकार कर रही हे। जिस के विरोध में बड़े पैमाने पर दलित आदिवासी समाज के लोगों में भाजपा सरकार के प्रति आक्रोश है वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा किए कार्यों को सराहा जा रहा है दलित आदिवासि समाज के लोग उस समय को भी याद किया जा रहा है जिस समय केवल उंगली दिखाने पर आरोपियों पर कार्रवाई हो जाती थी..।

इस विषय पर बुंदेलखंड के युवा दलित पिछड़े नेता जीतेन्द्र सिंह जाटव ने बताया की भाजापा की सरकार में लगातार दलित आदिवासी समाज के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा हे वही कांग्रेस पार्टी के शासन में मुख्यमंत्री माननीय दिग्विजय सिंह जी ने दिल खोलकर दलित आदिवासी समाज के लोगों पर सरकारी खजाना लुटाया और उसका लाभ इस वर्ग के लोगों को मिला बड़े पैमाने पर दलित आदिवासी समाज के लोगों को सरकारी नौकरी मिली और दलित आदिवासि समाज के लोगो की आर्थिक सामाजिक स्थिति सुधरी मध्य प्रदेश के इतिहास में जितना दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में दलित आदिवासी समाज को लाभ पहुंचाया गया है उतना कोई भी मुख्यमंत्री आज तक नहीं कर पाया है ।

मध्य प्रदेस में दिग्विजय सिंह जी नहीं होते तो कांग्रेस का हाल उतरप्रदेश जैसा हो जाता।

राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह जी ने बहुजन समाज पार्टी से जुड़े कर्मचारी संगठन बामसेफ़ की काट के रूप में अजाक्स (अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ) बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. अगर वो ऐसा नहीं करते तो बहुत तेजी से बढ़ रहे बामसेफ़ और बहुजन समाज पार्टी मध्य प्रदेस में इतनी मजबूत हो जाती की कांग्रेस का वही हाल होता जो उतरप्रदेस में हे आज कांग्रेस की जो मजबूत स्थति मध्य प्रदेस में हे उसका मुख्य कारण दिग्विजय सिंह जी की राजीनीतिक कुटनीति ही थी।

दिग्विजय सिंह जी का साल 2002 का दलित एजेंडा भी दरअसल मध्यप्रदेश के दलितों को आत्मसात करने की एक राजनीतिक पहल थी.
मध्य प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी से कड़ी चुनौती मिलने के कारण 1980 के दशक में कांग्रेस ने आदिवासियों और दलितों को पार्टी से जोड़ने के लिए कई क़दम उठाए.कांग्रेस सरकारों ने आदिवासियों और दलितों के लिए विशेष पैकेजों की घोषणा की और मुख्यमंत्री के रूप में दिग्विजय सिंह जी के ज़रिए उठाए गए कई क़दम भी इसी दिशा में थे. ।

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