म.प्र : रास्ता खराब होने के कारण महिलाओं की डिलेवरी घर पर या फिर रास्तें में प्रशासन खामोश या लचर

कैलारस। अचानक मेरे दर्द होना शुरू हुआ तब घड़ी में लगभग चार बज रहे होगे। मैने घर के सदस्यों को जगाया और उनसे अपने प्रसव पीढ़ा की बात कही । आशा दीदी को फोन कर घर बुलाया। आशा दीदी नेे हर बार की तरह इस बार भी जननी एक्सप्रेस के लिये फोन किया। लेकिन फोन पर गाड़ी आॅपरेटर का जबाब आया कि बारिस के कारण रास्ता खराब है जननी एक्सप्रेस आपके गाॅव में नहीं पहुॅच सकती है। फिर क्या था पिछली बार की ही तरह इस बार भी बारिस के मौसम में परिजन जब मुझे घर से अस्पताल के लिये पैदल ही लेकर रवाना हुए। घर से अस्पताल जाने के लिये डेढ किलोमीटर पैदल चलना था लेकिन दर्द तेज हो जाने से मेरा बच्चा रास्तें में ही हो गया।
यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। बघरोली पंचायत के रामपुरा निवासी ललिता जाटव पत्नी बिनोद जाटव ने संबाददाता से बात करते हुए बताया कि रामपुरा की दलित बस्ती के लोगो को बारिस के मौसम काफी दिकत्तों को सामना करना पढ़ता है। मेरे ही दोनो प्रसव रास्तें में हुए है पहली लड़की जिसका जन्म 25 सितंबर 2015 को , और दूसरा लड़का जो 24 अगस्त 2017 को सुबह 5 बजे रास्तें में ही होगये । मैं ही नही गाॅव में अन्य और भी महिलाऐं है जिनके प्रसव बारिस के मौसम में घर पर ही या फिर अस्पताल ले जाते वक्त रास्तें में हो गये है।
विश्वभर में आज वर्ड हेल्थ ओरगनाइजेसन जच्चा और बच्चा पर लाखों रूपये खर्च कर रही है जिसके मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आये जिसको ध्यान में रखते हुए जननी एक्सप्रेस , एस. एन. सी. यू. एवं एन. बी. एस. यू. बार्ड , सुरक्षित प्रसव के साथ सभी जच्चाओं को प्रोत्साहन राशि आदि कई प्रकार की सुबिधाऐं दी जा रही है। ताकि सुरक्षित प्रसव हो, जच्चा और बच्चा दोनो स्वस्थ्य हो। लेकिन आज मुरैना जिले की कैलारस जनपद क्षेत्र अंतर्गत आने बाली बघरोली पंचायत की सवा सौकड़ा घरों की दलित बस्ती रामपुरा नाम की कई महिलाओं के प्रसव रास्तें मे ही हुए है जिसका कारण रास्ता कच्चा होना है। कच्चा रास्ता बारिस के दिनों में इतना खराब हो जा है कि लोगो को आने जाने में भी बाहुत समस्याओं को सामना करना पढ़ता है। स्थानिय निवासियों पंचायत से लेकर जिला और मुख्यमंत्री के नाम से कई वार कलेक्ट्रेड पर भी ज्ञापन सौंप चुके है लेकिन दलितो की आज दिनांक तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
कैलारस जनपद पंचायत की बघरोली पंचायत के रामपुरा दलित बस्ती है यह बस्ती कैलारस से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस दलित बस्ती में सवा सैकड़ा दलितों के घर है रामपुरा पर 576 की जनसंख्या है जिसमें 321 पुरूष और 255 महिलाऐं है। रामपुरा में बच्चों की शिक्षा के लिये शासकीय प्राथमिक विद्यायल संचालित है जिसमें 67 बच्चें दर्ज है जिनमें 29 लडके और 38 लड़कियाॅ है। पेयजल के लिये केवल एक ही हैण्डपम्प है जिससे आये दिन गाॅव में आपसी विवाद होते रहते है। बिजली की सुबिधा आज से छः माह पहले थी लेकिन कुछ घरों के बिजली के बकाया के कारण से बिजली कम्पनी द्वारा ट्राॅसफार्मर उठा लिया गया है जिससे आज रात के अंधेरे में यह बस्ती शाम होते ही डूब जाती है।
विगत पाॅच वर्षों जिन महिलाओं के प्रसव रास्ते में या फिर घर पर हुए है
श्रीमती मंजू जाटव पत्नी राजेश जाटव,श्रीमती आरती जाटव पत्नी बारेलाल श्रीमती रंगीला जाटव पत्नी लक्ष्मण ,श्रीमती हलुकी जाटव पत्नी दीमान
श्रीमती उम्मेदी जाटव पत्नी राकेश ,श्रीमती ललिता जाटव पत्नी विनोद – के एक लड़की व एक लड़का है दोनो का जन्म रास्तें में हुआ। श्रीमती सुरक्षा जाटव पत्नी सुरजीत – आज से दो बर्ष पहले सुरक्षा का प्रसव रास्तें में हुआ जिसमें लडकी उल्टी होने की बजह से काफी दिक्कतें आई अंत में हालात ऐसे हुए कि जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरें थी जिसमें अस्पताल जाकर जच्चा को बचा लिया गया लेकिन नवजात बच्ची खत्म हो गई । श्रीमती सुनिया जाटव पत्नी संगम ,श्रीमती सुमन जाटव पत्नी लायक
बीमारों को ले जाते है चार पाही पर – दलित बस्ती रामपुरा बघरोली के लोग बारिस के दिनों में घर में गंभीर बीमार व्यक्ति को चारपाही पर ढेड़ किलोमीटर तक पैदल ले जाते है और जब बघरोली पहुॅचते है तो वहाॅ से किसी भी साधन के जरिए कैलारस अस्पताल लेकर पहॅुचतें है। राजबीर सिंह जाटव का कहना है कि दो माह से मेरी पत्नी बीमार थी जिसके चलते 22 अगस्त को मेरी पत्नी की तबियत बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाने के लिये चार पाही से ले जाकर बघरोली से बाहन से अस्पताल ले जा सके।
रूपसिंह जाटव ढेड़ किलोमीटर बघरोली गाॅव तक पहॅुच मार्ग कई वर्षो से कच्चा है जिससे हम लोगो को बारसात के दिनों में दिक्कतों का सामना करना पढ़ता है कई बार आवेदन दे चुके है लेकिन आज तक कोई हल नहीं है आखिर दलितों की सुनबाई कौन करता है।
मीना जाटव (आशा कार्यकर्ता) रामपुरा बघरोली में बारिस के दिनों में बहुत ही समस्याओं का सामना करना पढ़ता है कई बार डिलेवरी के दौरान महिला को पौदल चलना मुश्किल होता है और फोन करने पर जननी एक्सप्रेस या कोई भी प्राइवेट गाड़ी नहीं आती है जिसके कारण बघरोली गाॅव तक पैदल ही ढेड़ किलोमीटर पैदल ही चलना पढ़ता है। जिससे कई वार रास्ते में ही प्रसव करना पढ़ता है। क्या करें मजबूर है।
अशोक जाटव ढेड़ किलोमीटर के रास्ते के लिये हमें दिक्कतों का समना करना पढ़ता है बच्चों और बुजुर्गो के लिये भी दिक्कतें है इन समस्याओं को लेकर कई बार आवेदन दिये है लेकिन आज तक कोई सुनवाई नही है।।
मंसाराम जाटव – रामपुरा की समस्या को लेकर हमने पंचायत के सचिव और संरपंच से लेकर कलेक्टर साहब तक आबेदन दे चुके है सभी ने जल्द समस्या हल करने का आश्वासन दिया है लेकिन आज दिनांक तक हमारी समस्याओं का हल नही हुआ । हम दलितों की सुनवाई कोई नहीं करता है।

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