मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के हितग्राहियों को रियायती दर पर राशन देने की व्यवस्था अब बंद कर दी जाएगी

मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के हितग्राहियों को रियायती दर पर राशन देने की व्यवस्था अब बंद कर दी जाएगी। इसकी जगह नकद सबसिडी देने का फार्मूला लागू होगा। इसमें एक रुपए में राशन दुकान से दिए जाने वाले गेहूं, चावल और नमक की जगह सबसिडी की राशि सीधे खाते में जमा करा दी जाएगी। लोग खुले बाजार से अपनी पसंद के अनुसार राशन खरीद सकेंगे। यह प्रयोग राजधानी भोपाल से सटी नगर परिषद रायसेन के औबेदुल्लागंज और होशंगाबाद के सोहागपुर में किया जाएगा। योजना लागू करने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग ने केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है।

सरकार ने राशन बांटने की जगह नकद सबसिडी देने का फैसला सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लेकर शिकवा-शिकायत के मद्देनजर किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद्य विभाग की समीक्षा के दौरान नकद सबसिडी देने की योजना पर विचार करने के निर्देश दिए थे।

दरअसल, पीडीएस के राशन में गड़बड़ी और समय पर वितरण नहीं होने को लेकर शिकायतें आम हैें। इसके मद्देनजर विभाग ने हितग्राही को आधार से लिंक करने का प्रयास भी किया पर यह अब तक पूरी तरह नहीं हो पाया है। इसकी वजह से प्रदेश में कई जगह पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के जरिए पहचान पुख्ता करके राशन वितरण का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।

मुख्यमंत्री ने समीक्षा में जबलपुर सहित कुछ अन्य शहरों में इस व्यवस्था को असफल करने के षड्यंत्र को लेकर नाराजगी भी जताई थी। तभी यह तय हो गया था कि सरकार धीरे-धीरे पीडीएस के काम से हाथ खींच लेगी। इसकी शुरुआत औबेदुल्लागंज और सोहागपुर नगर परिषद से होगी। इसके लिए खाद्य विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया है।

16-17 रुपए पहुंचेंगे खाते में
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि दोनों नगर परिषद में पीडीएस के हितग्राही को गेहूं के लिए 16-17 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से खाते में दिए जाएंगे। इसी तरह चावल के करीब 21-22 रुपए प्रति किलोग्राम मिलेंगे। दरअसल, सरकार एक रुपए किलोग्राम में जो गेहूं और चावल देती है, उसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 18 और 23 रुपए प्रति किलोग्राम खर्च करती है। खाद्य सुरक्षा कानून के तहत 2 रुपए किलोग्राम में गेहूं और 3 रुपए किलोग्राम के हिसाब से चावल मिलता है। इसमें सरकार अन्न्पूर्णा योजना के जरिए अपने खजाने से राशि लगाकर अनाज एक-एक रुपए किलोग्राम में देती है।
सरकार को फायदा, हितग्राहियों को नुक्सान
सूत्रों का कहना है कि नकद सबसिडी देना सरकार के लिए फायदे का सौदा रहेगा। इसके बाद सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर ध्यान नहीं देना पड़ेगा। इसमें होने वाले भ्रष्टाचार के कारण जनता सीधे सरकार से नाराज हो जाती है। अब वो संकट नहीं रहेगा। हितग्राहियों को नुक्सान यह होगा कि जब बाजार में दाम बढ़ जाएंगे तब भी सब्सिडी उतनी ही आएगी जो बजट के वक्त फिक्स की गई है।

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