CASH लेनदेने के ​नियम बदले, 1 अप्रैल के बाद होगी कार्रवाई

नोटबंदी के बाद सरकार ने काले धन पर अंकुश लगाने के लिए एक और कठोर कदम उठाया है। सरकार नेवित्त विधेयक 2017′ में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसके पारित होने पर आगामी एक अप्रैल से दो लाख रुपये से अधिक का नकद लेनदेन अवैध माना जाएगा। सरकार ने पहले यह सीमा 3 लाख तय करने का प्रस्ताव किया था। इसे अब घटाकर दो लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, पहली जुलाई, 2017 से अगर कोई व्यक्ति अपनाआधारनंबर आयकर विभाग को नहीं देता है तो उसका पैन नंबर रद हो जाएगा।जुलाई से पैन नंबर बनवाने और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए भीआधारनंबर जरूरी होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्त विधेयक 2017 में 40 आधिकारिक संशोधन मंगलवार को लोकसभा में पेश किए। इनके जरिये आयकर कानून में इस आशय के बदलाव के साथसाथ कई अन्य कानूनों में भी संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। वित्त विधेयक के माध्यम से कई कानूनों में एक साथ संशोधन करने के सरकार के कदम का विपक्ष ने विरोध किया।

हालांकि जेटली के संसदीय परंपराओं, संवैधानिक विधायी साक्ष्यों का हवाला देने के बाद स्पीकर सुमित्रा महाजन ने विपक्षी सदस्यों की दलीलों को दरकिनार कर विधेयक पर चर्चा शुरू करवाई। बाद में राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने ट्वीट कर कहा कि वित्त विधेयक में संशोधन पेश करते हुए सरकार ने नकद लेनदेन की सीमा तीन लाख से घटाकर दो लाख रुपये कर दी है। अगर कोई इस सीमा से अधिक राशि का नकद लेनदेन करता है तो उसे गैरकानूनी माना जाएगा।

प्रावधान का उल्लंघन करने पर उस व्यक्ति को अतिरिक्त इस राशि के बराबर जुर्माना भरना पड़ेगा। आम बजट में था प्रावधान वित्त मंत्री ने आम बजट में कैश पर अंकुश लगाने के इरादे से वित्त विधेयक 2017 के जरिये आयकर कानून में धारा 269एसटी जोड़ने का प्रस्ताव किया था।

उस समय इसमें नकद लेनदेन की सीमा तीन लाख तय की गई थी। नकदी नोटों के आधार पर किए जाने वाले सौदों पर अंकुश लगाने का सुझाव काले धन को लेकर बनी विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने दिया था। नहीं रख सकेंगे कई पैन नंबर वित्त विधेयक में सरकार ने एक और महत्वपूर्ण संशोधन का प्रस्ताव किया है।

यह संशोधन पैन बनवाने तथा आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिएआधारनंबर अनिवार्य बनाने के संबंध में है। एक जुलाई से पैन नंबर के आवेदन और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिएआधारनंबर जरूरी हो जाएगा।

इस उपाय का असर यह होगा कि जो लोग अभी कई पैन नंबर लेकर आयकर विभाग से अपनी असली आमदनी छिपाते हैं, उन पर अंकुश लगेगा। इससे काले धन के खिलाफ मुहिम तेज होगी। जिन लोगों के पास आधार नंबर नहीं है उन्हें इसके लिए आवेदन करना होगा। इसके बाद आधार आवेदन संख्या को पैन नंबर की अर्जी में दे सकेंगे।

यदि कोई व्यक्ति आधार नंबर आयकर विभाग को सूचित नहीं करता है तो उसका पैन नंबर रद हो जाएगा। साथ ही सरकार उसके खिलाफ आयकर कानून के तहत कार्रवाई कर सकती है। इस संबंध में आयकर कानून 1961 में नई धारा 139एए जोड़ने का प्रस्ताव वित्त विधेयक में किया गया है।

Categories: रोजगार और शासन की योजना

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